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2019 तक कालाबाजार खत्म करने का लक्ष्य अच्छा कदम

सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट में कालाबाजार को 2019 तक खत्म करने का लक्ष्य अच्छा कदम है और साथ ही जो सबसे महत्वपूर्ण कदम उठाने की जरूरत है, वह है नकली उत्पादों की वजह से हुए घाटे से निपटना। यह बात विशेषज्ञों ने कही है। ऑथेंटिकेशन सोल्यूशन प्रोवाइडर एसोसिएशन के प्रेसीडेंट यू.के. गुप्ता ने कहा, "हमारा उद्योग इन समस्याओं को जड़ से उखाड़ने मंे सरकार की मदद कर सकता है। एक ब्रांड का मालिक जो एक ऑथेंटिकेशन सोल्यूशन को एंप्लाय करता है, वह जालसाज की हिस्सेदारी में कटौती कर अपने व्यापार को बढ़ा सकता है। यह बढ़ता व्यापार करों और शुल्कों का अधिक संग्रह करके राजकोष में अधिक राजस्व लाएगा।" 

 

इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए एक सकरात्मक कदम के रूप में एस्पा व मैसे फ्रैंकफर्ट इंडिया के साथ मिलकर अगले महीने ऑथेंटिकेशन सोल्यूशन पर भारत के पहले अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन व प्रदर्शनी 'ऑथेंटिकेशन फोरम 2017' का आयोजन कर रहा है। 

 

एक सर्वेक्षण के अनुसार, सालाना नकली उत्पादों की वजह से विश्व स्तर पर होने वाला नुकसान 700 अरब डालर के बराबर है, जिसके कारण ब्रांड बाजार में कंपनियां अपनी हिस्सेदारी का 20 फीसदी खो देती हैं और कंपनियों को नकली उत्पादों की वजह से प्रति आमदनी और मुनाफे पर लगभग 10 प्रतिशत घाटे का सामना करना पड़ता है। 

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बजट अनुमान में 2015-16 के लिए भारत सरकार ने 5.6 खरब (सकल घरेलू उत्पाद का 3.9) रुपये पर अपने राजकोषीय घाटे का अनुमान लगाया था। वर्ष 2015-16 में सकल घरेलू उत्पाद 141 खरब रुपये था, सरकारी खजाने का अनुमानित नुकसान 26,190 करोड़ रुपये था। ऐसे में सरकारी खजाने को उनकी गतिविधियों के लिए राजस्व बढ़ाने की जरूरत है, उन्हं उपभोक्ता हितों की रक्षा करने की भी जरूरत है। 

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