Indian Stock Market Tips- दिवाली से अबतक Gold ने दिया 7% रिटर्न; इक्विटी से ज्यादा मिला फायदा, चांदी ने किया निराश
पिछली दिवाली से अबतक रिटर्न का आंकड़ा देखें तो गोल्ड ने इक्विटी के मुकाबले बेहतर रिटर्न दिया है.
गोल्ड को लेकर निवेशकों में हमेशा यह सेंटीमेंट रहा है कि यह निवेश का सुरक्षित विकल्प है. पिछली दिवाली से अबतक रिटर्न का आंकड़ा देखें तो गोल्ड ने इक्विटी के मुकाबले बेहतर रिटर्न दिया है. सेंसेक्स में जहां महज 6 फीसदी और निफ्टी में निगेटिव रिटर्न मिला है. वहीं, गोल्ड ने इस दौरान 7 फीसदी रिटर्न दिया है. एक्सपर्ट आगे गोल्ड में और बेहतर रिटर्न की उम्मीद कर रहे हैं. हालांकि इस दौरान चांदी ने निराश किया है और उसमें निगेटिव 4.3 फीसदी रिटर्न मिला है.
गोल्ड Vs इक्विटी Vs चांदी
गोल्ड में 7% रिटर्न
पिछली दिवाली के आसपास 17 अक्टूबर 2017 को MCX पर गोल्ड का भाव 29680 रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो 1 नवंबर 2018 को बढ़कर 31800 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया है. यानी MCX पर गोल्ड ने करीब 7 फीसदी रिटर्न दिया है.
इसी तरह से बुलियन मार्केट की बात करें तो 17 अक्टूबर 2017 को दिल्ली बुलियन मार्केट में गोल्ड 30880 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव पर था जो 1 नवंबर 2018 को बढ़कर 32860 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया. यानी करीब 6.5 फीसदी का रिटर्न मिला.
चांदी में 4.3% निगेटिव रिटर्न
पिछली दिवाली के आसपास 17 अक्टूबर 2017 को MCX पर चांदी का भाव 39850 रुपये प्रति किलोग्राम था, जो 1 नवंबर 2018 को घटकर 38800 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है. यानी MCX पर चांदी ने करीब 4.3 फीसदी निगेटिव रिटर्न दिया है.
इसी तरह से बुलियन मार्केट की बात करें तो 17 अक्टूबर 2017 को दिल्ली बुलियन मार्केट में चांदी 40450 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पर थी, जो 1 नवंबर 2018 को घटकर 39100 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई. यानी करीब 3.3 फीसदी निगेटिव रिटर्न मिला.
सेंसेक्स में 6% रिटर्न
19 अक्टूबर 2017 से 31 अक्टूबर 2018 की बात करें तो सेंसेक्स में महज 6 फीसदी ग्रोथ रही है. 19 अक्टूबर 2017 को सेंसेक्स 32389 के स्तर पर था, जो 1 नवंबर 2018 को 34432 के स्तर पर बंद हुआ. यानी इस दौरान 6 फीसदी ग्रोथ सेंसेक्स में देखने को मिली है.
निफ्टी में 1% निगेटिव रिटर्न
19 अक्टूबर 2017 को निफ्टी 10146 के स्तर पर था जो 1 नवंबर 2018 को 10380 के स्तर पर बंद हुआ. यानी करीब 1 फीसदी निगेटिव रिटर्न.
गोल्ड निवेश का बेहतर विकल्प
पिछले कई साल की रिटर्न हिस्ट्री देखें तो गोल्ड में एक स्थिर रिटर्न मिलता रहा है. गोल्ड के साथ पोर्टफोलियो डाइवर्सिफाई करने का फायदा है कि अगर इक्विटी या बॉन्ड में नुकसान हो रहा है तो गोल्ड उसकी कुछ हद तक भरपाई कर सकता है. वहीं, आपात स्थिति में गोल्ड को तुरंत कैश कराया जा सकता है. जो सबसे बड़ा फायदा है कि यह हेजिंग अगेंस्ट इनफ्लेशन के रूप में काम करता है.
गोल्ड में तेजी बने रहने की आशंका
अंतरराष्ट्रीय और घरेलू स्तर पर बाजारों में अनिश्चिता बने रहने की आशंका है. जियो पॉलिटिकल टेंशन और ट्रेड वार का जो दौर शुरू हुआ है, वह आगे भी लंबे समय तक जारी रहने का डर बना हुआ है. अमेरिका में सेल्स डाटा बेहतर नहीं आए हैं, वहीं मॉनेटरी पॉलिसी को लेकर स्थिति साफ नहीं है, ऐसे में डॉलर पर भी दबाव है. इन सब वजहों से निवेशकों का रुख इक्विटी मार्केट की बजाए सुरक्षित विकल्प माने जाने वाले सोने की तरफ बढ़ रहा है. फेस्टिव सीजन भी गोल्ड की डिमांड बढ़ने का बड़ा कारण है.
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