Indian Share market Tips- अजंता फार्मा: गिरावट में एडजस्ट हुए नेगेटिव फैक्टर
अजंता फार्मा का दूसरे क्वॉर्टर का रिजल्ट कमजोर होने के बावजूद एनालिस्ट इसके स्टॉक पर बुलिश हो रहे हैं क्योंकि कंपनी का परफॉर्मेंस उनके अनुमान से बेहतर रहा है। सितंबर क्वॉर्टर में कंपनी का कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 1 पर्सेंट बढ़ा जबकि कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट में 5% की गिरावट आई। कंपनी का रिजल्ट कमजोर रहने की वजह अफ्रीकी इंस्टीट्यूशन बिजनेस में सालाना 65% की तेज गिरावट रही। इसके चलते कंपनी के अफ्रीका रीजन की सेल्स रेवेन्यू सालाना आधार पर 38% घट गई।
अजंता के अफ्रीकी इंस्टीट्यूशन बिजनेस पर बना दबाव आने वाले क्वॉर्टर्स में जारी रह सकता है। इसको देखते हुए कंपनी के मैनेजमेंट ने 2018-19 की दूसरी छमाही के लिए अपना अनुमान सामान्य रखा है। अफ्रीकी इंस्टीट्यूशन बिजनेस में कमजोरी के चलते कंपनी के टोटल मार्जिन पर दबाव बना है, लेकिन इसका नेगेटिव असर डॉलर के मुकाबले रुपये में चल रही कमजोरी से कुछ हद तक कम हुआ है। इंस्टीट्यूशन बिजनेस से हासिल रेवेन्यू में कमी की भरपाई के लिए कंपनी अफ्रीका में ब्रांडेड बिजनेस पर फोकस बढ़ाने की कोशिश कर रही है। उसने अफ्रीका में हाल में आठ नए ब्रांडेड प्रॉडक्ट्स लॉन्च किए हैं।
रुपये में आई गिरावट से कंपनी के मार्जिन को सपोर्ट मिला तो है ही, साथ ही कॉम्पिटिटिव एडवांटेज बढ़ने से दूसरे एशियाई देशों को एक्सपोर्ट में भी सपोर्ट मिलेगा। एनालिस्ट कंपनी पर बुलिश इसलिए हो रहे हैं कि दूसरे इलाकों में इसकी मौजूदगी मजबूत बनी हुई है। अगर हम कंपनी के अफ्रीकी इंस्टीट्यूशन बिजनेस को नजरअंदाज कर दें तो इसकी सालाना रेवेन्यू ग्रोथ 22% है जो ठीकठाक है। कंपनी के डोमेस्टिक फॉर्म्यूलेशन बिजनेस (रेवेन्यू में 31% कंट्रिब्यूशन) की ग्रोथ सालाना आधार पर 5% रही है जबकि रेवेन्यू में 24% कंट्रिब्यूशन वाले एशिया जैसे एक्सपोर्ट मार्केट में सालाना ग्रोथ 30% रही है। अमेरिकी एक्सपोर्ट में सालाना आधार पर 208% की बढ़ोतरी हुई लेकिन उसकी सबसे बड़ी वजह लोबर बेस है। कंपनी के रेवेन्यू में अमेरिकी बिजनेस का कंट्रिब्यूशन 9% है।
कंपनी के अफ्रीकी बिजनेस में स्थिरता आने और कैपेसिट यूटिलाइजेशन बढ़ने के साथ ही नए प्लांट्स में प्रॉडक्शन शुरू होने से रेवेन्यू और नेट प्रॉफिट में बढ़ोतरी से अजंता के लिए फिस्कल ईयर 2019-20 अच्छा रह सकता है। दहेज और गुवाहाटी वाले प्लांट में कैपेसिटी यूटिलाइजेशन 15 से 20% की रेंज में है और एनालिस्टों का मानना है कि इन प्लांट्स में 2019-20 से ऑपरेशन ऑप्टिमम लेवल पर जा सकता है। कंपनी को दहेज प्लांट से अमेरिका और इमर्जिंग मार्केट्स में अपना जेनरिक बिजनेस फैलाने में मदद मिलेगी। वहां अभी वैलिडेशन प्रोसेस चल रहा है, और प्रॉडक्शन में 2019-20 से तेजी आ सकती है। गुवाहाटी के पहले फेज में प्रॉडक्शन शुरू हो चुका है, जबकि दूसरे और तीसरे फेज का एक्सपैंशन वाला काम चल रहा है। इसके 2019-20 तक पूरा हो जाने की उम्मीद है।
एनालिस्टों का कहना है कि स्टॉक की हालिया गिरावट में अफ्रीकी इंस्टीट्यूशन बिजनेस की नेगेटिविटी पहले ही फैक्टर हो चुकी है, इसलिए यह लॉन्ग टर्म नजरिए मिड कैप फार्मा स्पेस की स्ट्रॉन्ग पिक है।
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