क्रूड में लगी आग, आगे कैसी रहेगी चाल

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ओपेक के बाद अब गैर-ओपेक देश भी कच्चे तेल का उत्पादन घटाने पर सहमत हो गए हैं और इसका नतीजा ये हुआ है कि ग्लोबल मार्केट में क्रूड का दाम पिछले 1.5 साल की ऊंचाई पर चला गया है। ब्रेंट 55 डॉलर का जादुई आंकड़ा पार चुका है। आमतौर पर इस महीने में दुनिया भर के बाजारों में कारोबार ठंडा पड़ने लगता है। लेकिन 15 साल में तेल उत्पादकों के बीच हुए करार ने पूरे बाजार को हैरत में डाल दिया है। अब नजर अमेरिका पर है, क्रूड पर उसकी क्या होगी पॉलिसी होगी और यहां से आगे कैसी रहेगी क्रूड की चाल, जानने के लिए लेकर आए हैं हम ये खास पेशकश। 

                         इस साल ब्रेंट क्रूड में 119 फीसदी का उछाल आ चुका है। ब्रेंट क्रूड का भाव 26 डॉलर से बढ़कर 57 डॉलर पर पहुंच गया है। वहीं नायमैक्स पर डब्ल्यूटीआई क्रूड 54 डॉलर पर पहुंच गया है। दरअसल ओपेक और गैर-ओपेक देश उत्पादन घटाने पर सहमत हुए हैं, और इसी के चलते क्रूड के दाम में तेजी देखने को मिल रही है। जनवरी से ओपेक क्रूड का 12 लाख बैरल उत्पादन घटाएगा, जबकि गैर-ओपेक देश 5.58 लाख उत्पादन घटाएंगे। रूस उत्पादन घटाकर 1.094 करोड़ बैरल करेगा। अगले साल से ग्लोबल सप्लाई में 1.8 फीसदी की कटौती संभव है।

 

ओपेक की ओर से फिलहाल 3.36 करोड़ बैरल क्रूड का उत्पादन किया जा रहा है, जो जनवरी से घटकर 3.24 करोड़ बैरल पर आ जाएगा। वहीं रूस का अक्टूबर में क्रूड का उत्पादन 1.124 करोड़ बैरल था, जो अगले 6 महीने में घटकर 1.094 करोड़ बैरल होने का अनुमान है। ओपेक ने 12 लाख बैरल उत्पादन घटाने का फैसला किया है। जिसके तहत सऊदी अरब 40.5 फीसदी, इराक 17.5 फीसदी, यूएई 11.6 फीसदी, कुवैत 10 फीसदी और अन्य देश 20.4 फीसदी उत्पादन में कटौती करेंगे। क्रूड उत्पादक देशों में 15 साल बाद उत्पादन घटाने को लेकर सहमति बनी है।

 

हम आपको ओपेक के बारे में यहां बता रहे हैं, जो क्रूड उत्पादन करने वाले देशों का संगठन है। इस संगठन में फिलहाल 13 सदस्य देश हैं। दुनिया में 40 फीसदी क्रूड के मार्केट पर ओपेक का कब्जा है। ओपेक में सऊदी अरब की 40 फीसदी बाजार हिस्सेदारी है और इस संगठन में ज्यादातर खाड़ी के देश शामिल हैं। पिछले महीने इंडोनेशिया ओपेक से बाहर हो गया है।

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